सीरतुन्नबी पर विशेष- चिकित्सीय परामर्श की पराकाष्ठा में पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद सहाब का मार्गदर्शन -डॉ एम ए रशीद

सीरतुन्नबी पर विशेष

चिकित्सीय परामर्श की पराकाष्ठा में पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद सअव का मार्गदर्शन
———- डॉ एम ए रशीद, नागपुर

इंसान के साथ बीमारियां उसके जन्म से मृत्यु तक चलती रहती हैं । कुछ बच्चे जन्मजात रोगी पैदा होते हैं तो किसी को घंटे दो घंटे में बीमारियां आ घेरती हैं । बीमारियों से इंसान जूझते जूझते मरणासन्न अवस्था में आ जाता है । कर्ज और ऋण ले ले कर लोग रोगी का इलाज कराते रहते हैं। स्वस्थ न होने पर धन दौलत , आत्मा तक गंवाना पड़ती है । लंबा समय , लंबी प्रतीक्षा ,लंबी दूरी और इलाज का अधिक खर्च उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान कर देता है ।
इन बहुत सी परेशानियों से लोगों को राहत और सही मार्गदर्शन नहीं मिल पाता । अब वैध , हकीम का ज़माना नहीं जो बिना फीस के नाड़ी , नब्ज़ देखकर रोग बता दें । इस दौर में किसी चिकित्सक का मार्गदर्शन चाहिए तो उसकी फीस अनिवार्य रूप से देना होती है।
इन समस्याओं का समाधान सरलता पूर्वक अवश्य निकलना चाहिए । इसी कड़ी के अंतर्गत पैगंबर हज़रत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के मार्गदर्शन हर एक मुद्दे पर अनुकरणीय हैं। इसके बाद किसी ओर मार्गदर्शन की आवश्यकता नहीं हो सकती । उनके चिकित्सीय मार्गदर्शन को “तिब्बे नबवी” कहा जाता है ।
पैगंबर मोहम्मद साहब ने शहद, कलौंजी , अनार , मेथी , जामुन , आबे ज़मज़म , मसूर दाल , मूंगा , मोती ,अंबर , तुलसी , ककड़ी , सिरका , ऊंट, बकरी, गाय के दूध , गोश्त , मछली , चकुंदर , पनीर , संतरा , सौंठ , मांस , बैर , कपूर , लौकी , खजूर , अंजीर , जैतून , कद्दू , कस्तूरी , पानी , प्याज़ , बारिश का पानी , आदि पर बहुत सी जानकारियां देकर मानव जाति के लिए बड़ा उपकार किया है । आज यही वनस्पतियां , खनिज पदार्थ शोधकर्ताओं द्वारा मानव जाति के स्वस्थ लाभ के लिए आवश्यक बताईं जा रही हैं। इनके सेवन से तपेदिक , डायबिटीज , बवासीर , आंत के कृमि , कैंसर पेचिश , कोलेस्ट्रोल , मासिक समस्याएं आदि अनेकों बीमारियों में सफलतापूर्वक स्वस्थ लाभ प्राप्त होता है। आप सअव ने अनगिनत वस्तुओं के लाभ बता कर स्वास्थ और चिकित्सा जगत में मुख्य भूमिका निभाई है । उनसे सिद्ध होता है कि वे मानव जाति और समाज के लिए महान चिकित्सीय परामर्श की पराकाष्ठा पर विराजमान हैं।
पैगंबर मोहम्मद सअव ने मानव जाति को आस्था और बंदगी के अतिरिक्त शारीरिक और रूहानी शिक्षा के अनमोल तोहफे दिए हैं। इन सीमाओं में व्यक्ति का उठना बैठना , खाना पीना, सोना जागना स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
स्वस्थ सोच – स्वस्थ शरीर ही स्वस्थ सोंच रख सकता है । इसकी विशेषता का अनुमान पैगंबर मोहम्मद सअव के इस संदेश से लगाया जा सकता है कि उन्होंने कहा ” नैयमतों में सबसे पहले परलोक के दिन स्वास्थ्य की पूछताछ होगी” ।
परहेज़ और स्वच्छता – चिकित्सा जगत में परहेज़ का बहुत महत्व है कि “इलाज से बेहतर परहेज़ है” । पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब ने 1400 वर्ष पूर्व स्पष्ट कर चुके हैं कि परहेज़ तक़दीरे इलाही रोक सकता है। आप सअव ने स्वच्छता को इस्लाम की मूल बुनियाद बताया । इसी दृष्टिकोण से कोई भी बंदगी स्वच्छता और उसकी पाबंदी के साथ पूरी होती है । पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब ने कहा कि “शरीर को पवित्र रखना ईमान का हिस्सा है”। स्वच्छता के अंतर्गत शरीर को ग़ुसल नामी स्नान से पवित्र किया जाता है। प्रत्येक नमाज़ों से पहले वज़ू अनिवार्य है , यह भी स्वच्छता का एक उदाहरण है जिससे कि बहुत से रोगों से बचा जा सकता है। पर्यावरण प्रदूषण ने बहुत से रोगों को जन्म दिया है , इससे बचने के लिए नित नए उपाय बन रहे हैं , लेकिन पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने सदियों पूर्व एक योजना को अमल में लाकर कहा था कि ” स्वच्छता आधा ईमान है “। फिर अगर कोई बीमार हो जाता तो कहते कि “लोगों जब तुम बीमार हो जाओ तो इलाज कराओ” ।
आप सअव ने फ़रमाया कि “जब तुम किसी क्षेत्र में प्लेग की बीमारी का समाचार सुनो तो वहां मत जाओ अगर तुम किसी ऐसे क्षेत्र में हो जहां यह महामारी फैल चुकी हो तो वहां से बाहर ना जाओ”।
ज्वर में जौ और कभी चिकित्सक की आवश्यकता पर ज़ोर – हज़रत आयशा रज़ि कहती हैं कि पैगंबर हज़रत मोहम्मद सअव के घर वालों में से किसी को ज्वर होता तो आप सअव उसके लिए जौ का दलिया बनाने का आदेश देते ।
एक बार पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब रोगी की देखभाल के लिए तशरीफ़ ले गए तो आप सअव ने फ़रमाया चिकित्सक को बुला भेजो , इस पर किसी ने कहा ऐ अल्लाह के रसूल सअव ! क्या आप यह फ़रमा रहे हैं ? आप सअव ने फ़रमाया हां नि:संदेह अल्लाह ने रोग उतारा है तो उसकी दवा भी उतारी है ।
पेट बीमारियो की जड़ – बहुत से रोगों की जड़ अधिक भोजन करने से होती है। पवित्र क़ुरआन की सुरह आराफ़ की पंक्ति क्र 31 में अल्लाह का फ़रमान है कि ‘खाओ और पियो और फिज़ूल ख़र्ची मत करो (क्योंकि) अल्लाह / ईश्वर फिज़ूल ख़र्च करने वालों को पसंद नहीं करता “। हज़रत मोहम्मद साहब ने भी अधिक भोजन करने से मना किया है । उनका फ़रमान है इंसान को कमर सीधी रखने के लिए कुछ कोर (लुक़्मे) ही पर्याप्त हैं और बेशक अधिक भोजन करना ही पड़े तो पेट में एक तिहाई खाना एक तिहाई पानी और एक तिहाई वायु के लिए जगह हो । एक स्थान पर फ़रमाया गया है कि अल्लाह भूख से अधिक खाने वालों को नफ़रत की निगाह से देखता है ।
दांतों की स्वच्छता और पीलू की दातुन – दांतों का भोजन के साथ गहरा संबंध है । जठरांत्र संबंधी रोगों को रोकने के लिए दंत स्वच्छता अत्यधिक महत्व रखती है। पैगंबर हज़रत मोहम्मद सअव ने दांतों की सफाई पर बहुत ज़ोर देते हुए कहा, “‘अपना मुंह साफ रखो” । अगर मैं अपनी उम्मत पर परेशानी न डालता तो प्रत्येक नमाज़ से पहले उन्हें मिस्वाक (दतुन) का आदेश देता । आप सअव जब सुबह उठते तो अपने दंत मुबारक को दतुन से साफ करते थे। यह दतुन पीलू की होती थी । पीलू वृक्ष में बहुत से औषधीय गुण पाए जाते हैं। य पेड़ साल्वाडोरेसी परिवार का है। इसका वानस्पतिक नाम साल्वाडोरा पर्सिका है । इसकी चबाने वाली छड़ें मौखिक स्वच्छता, धार्मिक और सामाजिक उद्देश्यों के लिए उपयोग की जाती हैं। अंग्रेजी भाषा में इसे टूथब्रश ट्री , हिन्दी उर्दू में पीलू , मराठी और संस्कृत भाषा में कुम्भी के नाम से जाना जाता है।
दांतों की स्वच्छता और सुरक्षा स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है, व्यक्तित्व पर इसके सकारात्मक प्रभाव दिखाई देते हैं। पीले , गंदे दांत , सांसों की दुर्गंध से लोग उसके पास बैठने और बातचीत से कतराते हैं । दंत चिकित्सकों का मानना ​​है कि मानव जीवन में लगभग आधी बीमारियां खराब दांतों के कारण होती हैं। दांतों के ही माध्यम से ही कोई भी भोज्य पदार्थ पेट में जाता है। दांतों में सड़न , मसूढ़ों से मवाद आने पर दूषित भोज्य पदार्थ पेट में प्रवेश कर जाते हैं। व्यक्ति विभिन्न रोगों से पीड़ित होने लगता है।
विभिन्न रोगों से बचाव – स्वच्छता द्वारा विभिन्न रोगों से बचा जा सकता है इसलिए विशेषज्ञ स्वच्छता पर अत्यधिक बल देते हैं। अल्लाह/ ईश्वर ने पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब को आदेश दिया “ऐ पैग़ंबर सअव अपना पहनावा स्वच्छ रखिए और गंदगी से पूरी तरह परहेज़ कीजिए” । अल्लाह/ ईश्वर स्वयं पवित्र है , पवित्रता और स्वच्छता को पसंद करता है । पैगंबर हजरत मोहम्मद का फ़रमान है तीन चीजों से बचो जो तिरस्कृत का कारण हैं – पानी के घाट पर , छांव में , रास्ते में मूत्र और शौच त्याग करने से । स्थिर पानी में मल मूत्र त्याग करने से अस्वच्छता शरीर के लिए हानिकारक होती है । पैगंबर हज़रत मोहम्मद साहब ने कहा कि “तुम में से कोई व्यक्ति स्थिर पानी में मूत्र त्याग ना करे”।
नवजात शिशु के कान में अज़ान और इक़ामत – नवजात शिशु को स्नान ( ग़ुस्ल ) के पश्चात उसके कानों में अज़ान और इक़ामत कहना चाहिए । चिकित्सक के परामर्श में किसी रोग के कारण बच्चे को नहलाना हानिकारक है, तो गंदगी साफ करने के बाद अज़ान और अक़ामत में देरी नहीं करनी चाहिए।
मृत्यु उपरांत भी सफाई का आदेश – पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब ने बताया कि जब किसी मुसलमान की मृत्यु हो जाए तो मृत्यु उपरांत अल्लाह के सुपुर्द करने से पहले उसे बेरी के पत्तों के कुनकुने पानी से नहलाना और वज़ू करना चाहिए। पवित्र कपड़ों में लपेटकर उसे शीघ्र ही दफ़न किया जाना चाहिए । शीघ्रता इसलिए कि दुर्गंध भी न फैल सके ।

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