नागपुर में बोरवेल खुदाई पर प्रतिबंध, जमाअते इस्लामी हिंद ने फैसले पर पुनर्विचार की मांग की
नागपुर: कम बारिश और जलाशयों में घटते जलसंग्रह के बीच जिला प्रशासन ने बोरवेल खुदाई पर लगाया प्रतिबंध, जलापूर्ति बंद रखने के फैसले पर भी उठाए सवाल
नागपुर: जिले में कम बारिश और जलाशयों में घटते जलसंग्रह के कारण आगामी दिनों में संभावित जलसंकट को देखते हुए जिला प्रशासन ने नए बोरवेल की खुदाई पर प्रतिबंध लगा दिया है। जिलाधिकारी एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष कुमार आशीर्वाद ने आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत यह आदेश जारी किया है। यह प्रतिबंध तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक लागू रहेगा।
प्रशासन के इस फैसले का उद्देश्य भूजल स्रोतों का संरक्षण करना, पेयजल स्रोतों पर अतिरिक्त दबाव कम करना और आने वाले दिनों में पानी की संभावित किल्लत को गंभीर होने से रोकना है। यह आदेश नागपुर जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया गया है।
हालांकि, दूसरी ओर जमाअते इस्लामी हिंद नागपुर ने बोरवेल पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और शहर की जलापूर्ति 24 घंटे बंद रखने के फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की है। संगठन के मीडिया प्रभारी डॉ. एम. ए. रशीद ने प्रशासन से जनहित को ध्यान में रखते हुए व्यावहारिक और दीर्घकालीन समाधान अपनाने का आग्रह किया है।
नए बोरवेल की खुदाई और पुराने बोरवेल को गहरा करने पर रोक
जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार, अब जिले में किसी भी प्रकार के नए बोरवेल की खुदाई नहीं की जा सकेगी। इसके अलावा पहले से मौजूद बोरवेल को और गहरा करने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है।
यह नियम निजी व्यक्तियों, किसानों, हाउसिंग सोसाइटियों, बिल्डरों, उद्योगों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, संस्थाओं और बोरवेल खुदाई करने वाले ठेकेदारों पर लागू होगा। बोरवेल रिग मालिकों और मशीन ऑपरेटरों को भी आदेश का पालन करना होगा।
हालांकि, प्रशासन ने पहले से मौजूद बोरवेल का नियमित इस्तेमाल बंद करने का कोई निर्देश नहीं दिया है। यानी प्रतिबंध नए बोरवेल की खुदाई और मौजूदा बोरवेल को गहरा करने से संबंधित है।
सरकारी जलापूर्ति कार्यों को प्रतिबंध से छूट
जिला प्रशासन ने सार्वजनिक पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और संभावित जलसंकट से निपटने के लिए सरकारी एजेंसियों द्वारा किए जाने वाले बोरवेल खुदाई कार्यों को प्रतिबंध से छूट दी है।
सरकारी कार्यादेश के तहत ठेकेदारों द्वारा किए जाने वाले संबंधित कार्य भी निर्धारित शर्तों के अधीन प्रतिबंध से बाहर रहेंगे। हालांकि, संबंधित एजेंसियों को सरकारी कार्यादेश, सक्षम प्राधिकारी की प्रशासनिक मंजूरी और जलसंकट निवारण से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध रखने होंगे।
इसके साथ ही भूजल संबंधी कानूनों, तकनीकी मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
जलापूर्ति बंद रखने के फैसले पर भी पुनर्विचार की मांग
जमाअते इस्लामी हिंद नागपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. एम. ए. रशीद ने प्रशासन से आग्रह किया है कि पाइपलाइन में रिसाव की मरम्मत के नाम पर पूरे शहर की जलापूर्ति लंबे समय तक बंद रखने के बजाय वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई जाए।
उन्होंने कहा कि जलापूर्ति बाधित होने से आम नागरिकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। विशेष रूप से उन परिवारों को अधिक कठिनाई होती है, जिनके पास पानी जमा करने के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
डॉ. रशीद ने अपने बयान में कहा कि पहले 60 घंटे की जलापूर्ति बंदी के बाद भी पेंच जलापूर्ति प्रणाली में रिसाव की मरम्मत पूरी तरह नहीं हो पाने के कारण दोबारा शहर की जलापूर्ति बाधित होने की स्थिति तकनीकी दृष्टि से चिंता का विषय है।
उन्होंने प्रशासन से इस मामले में पुनर्विचार करने और मरम्मत के दौरान नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, ऐसी व्यवस्था विकसित करने की मांग की है।
जापान और सिंगापुर जैसी आधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव
डॉ. एम. ए. रशीद ने पाइपलाइन में रिसाव की मरम्मत के लिए आधुनिक तकनीक अपनाने का सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि जापान और सिंगापुर जैसे देशों में इस्तेमाल होने वाली ऐसी तकनीकों का अध्ययन किया जाना चाहिए, जिनकी मदद से कई मामलों में सड़क की खुदाई किए बिना पाइपलाइन के रिसाव की मरम्मत की जा सकती है।
उनके अनुसार, यदि ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाए तो बार-बार सड़क खोदने की जरूरत कम हो सकती है और जलापूर्ति बाधित होने की समस्या से भी राहत मिल सकती है।
उन्होंने सुझाव दिया कि पूरे शहर की जलापूर्ति एक साथ बंद करने के बजाय क्षेत्रवार व्यवस्था लागू की जाए। मरम्मत का काम अलग-अलग क्षेत्रों में निर्धारित समय के अनुसार किया जाए, ताकि एक इलाके में मरम्मत होने के दौरान अन्य क्षेत्रों में जलापूर्ति जारी रखी जा सके।
रात में मरम्मत और वैकल्पिक जल भंडारण की व्यवस्था हो
डॉ. रशीद ने पाइपलाइन की मरम्मत का काम मुख्य रूप से रात के समय करने का सुझाव भी दिया है, ताकि दिन में पानी की जरूरत वाले नागरिकों को कम परेशानी हो।
उन्होंने कहा कि शहर के बड़े जल भंडारों के साथ वैकल्पिक जल भंडारण की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। यदि किसी एक जल भंडार में पानी की कमी हो या उसकी सफाई और मरम्मत करनी पड़े, तो दूसरे भंडार के माध्यम से जलापूर्ति जारी रखी जा सके।
इसके अलावा, उन्होंने पाइपलाइन में रिसाव का समय रहते पता लगाने के लिए सेंसर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित तकनीक का इस्तेमाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। इससे रिसाव की पहचान समय रहते की जा सकेगी और बड़े स्तर पर पानी की बर्बादी रोकने में मदद मिल सकती है।
बोरवेल पर पूर्ण प्रतिबंध के बजाय पंजीकरण प्रणाली लागू करने की मांग
बोरवेल खुदाई पर लगाए गए प्रतिबंध के संबंध में डॉ. एम. ए. रशीद ने कहा कि प्रशासन को पूर्ण प्रतिबंध के बजाय पंजीकरण और निगरानी की व्यवस्था पर भी विचार करना चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि बोरवेल की खुदाई को नियमानुसार पंजीकृत किया जाए और भूजल के इस्तेमाल पर निगरानी रखी जाए। इससे पानी के अनियंत्रित दोहन को रोकने के साथ-साथ आवश्यकताओं के अनुसार नियमन करने में मदद मिल सकती है।
उन्होंने शहर की बहुमंजिला इमारतों में वर्षा जल संचयन प्रणाली अनिवार्य करने की मांग भी की। उनके अनुसार, वर्षा के पानी को जमीन में पहुंचाने और उसका उचित भंडारण करने से भूजल स्तर को बनाए रखने में मदद मिल सकती है।
भूजल संरक्षण के लिए दीर्घकालीन योजना जरूरी
डॉ. रशीद ने कहा कि भूजल स्तर में गिरावट रोकने के लिए केवल बोरवेल पर प्रतिबंध लगाना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ वर्षा जल संचयन, वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण और पानी के विवेकपूर्ण इस्तेमाल जैसे उपायों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि जलसंकट से निपटने के लिए तत्काल राहत देने वाले कदमों के साथ दीर्घकालीन योजना भी तैयार की जाए, ताकि नागरिकों को बार-बार जलापूर्ति बंद होने और पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना न करना पड़े।
कुल मिलाकर, नागपुर जिले में संभावित जलसंकट को देखते हुए प्रशासन ने भूजल संरक्षण के लिए बोरवेल खुदाई पर प्रतिबंध लगाया है। वहीं, जमाअते इस्लामी हिंद नागपुर ने इस फैसले के साथ-साथ जलापूर्ति बंद रखने की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्थायी समाधान तलाशने की मांग की है।








