“रमजान” पर विशेष- आखिरत के अकीदे का जिंदगी पर प्रभाव

रमजान पर विशेष

आखिरत के अकीदे का जिंदगी पर प्रभाव

इंसान का दुनिया की जिंदगी के साथ आखिरत की जिंदगी से गहरा नाता है । मृत्यु पश्चात उसे हमेशा आखिरत की ही जिंदगी गुजारना है । इंसान जब अल्लाह की हस्ती और आख़िरत के दिन पर यकीन कर लेता है तो उसकी जिंदगी में ज़बरदस्त क्रांति आती है । वह दुनिया की जिंदगी को उत्तरदायित्व हैसियत वाली जिंदगी से जीता है। इसलिए कि आखिरत में अल्लाह के सामने मेरी पकड़ न हो जाए। वह अपनी इच्छाओं की पूर्ति और मनमाने कामों से रुकने लगता है और अपनी इच्छाओं को पवित्र क़ुरआन और हदीस मुबारक के बताए हुए निर्देशों पर चलाने लगता है । वह यह समझता जरूर है कि उसकी इच्छाओं की पूर्ति के लिए उसे स्वतंत्र जरूर कर दिया गया है , मगर यह सोच कर कि दुनिया एक परीक्षा स्थल है । इसमें हम अपने इरादे को जिस तरह इस्तेमाल करेंगे उसी के अनुसार आखिरत में परिणाम मिलेगा । ये विचार जब उसके दिल दिमाग में बैठ जाते हैं तो इस दुनिया में वह अपना कदम नपे तुले अंदाज में रखने लगता है । हर काम के वक्त वह यह जरूर सोचता है कि आख़िरत में इस कर्म का परिणाम मेरे हक में अच्छा निकलेगा या बुरा ।
ऐसे विचार दिल दिमाग में बैठ जाने के बाद संभव ही नहीं कि वह छुपकर भी कोई बुरा काम कर सके । दुनिया में चाहे इस बुराई का कोई बुरा परिणाम सामने ना आए किंतु आख़िरत में उसका परिणाम बुरा ही निकलेगा । इसलिए कि उसे विश्वास होता है कि अल्लाह तआला सीधे तौर पर हर किसी के अच्छे बुरे काम और हर अच्छी बुरी हरकतों को देख रहा है और फिर वह फरिशतों के माध्यम से इसका रिकॉर्ड भी तैयार कर रहा है कि कोई भी अपने किए को झुठला न सके । जब कोई बंदा नेक और भलाई के काम करेगा तो उसे आशा और विश्वास होगा कि इस दुनिया में चाहे कोई बदला ना मिले , इसकी वजह से उसे तकलीफ ही क्यों ना पहुंचे मगर आखिरत में अल्लाह तआला उसका बदला और इनाम जरूर देगा । अगर हम अच्छा काम करेंगे तो वह अपनी रहमतों से नवाजेगा बशर्ते कि उसमें दिखावा न हो। अगर कोई बंदा बुरे काम करेगा तो सजा और उस कर्म की लानत का हकदार बन जाएगा । दुनिया में कानूनी धरपकड़ से बचने की इंसान हज़ार राहें निकाल ले मगर जब आखिरत का यकीन और विश्वास उसके दिल दिमाग में बैठ जाता है तो किसी बाहरी दबाव के बिना आदमी बुराइयों से बचा रहता है ।
इन पंक्तियों से स्पष्ट होता है कि दुनिया के जीवन के साथ साथ परलोक की जीवन का होना कितना आवश्यक है । अगर वह ना होगा तो हमारी मौजूदा जिंदगी भर बिना उद्देश्य रह जाएगी और बुराई भलाई की तमीज उठ जाएगी । नेकी और भलाई करने में आदमी को कोई लज्जत और आनंद प्राप्त नहीं होगा और ना उसका शौक पैदा होगा और ना बुराई से उसे घृणा होगी और उसके करने में उसे कोई हिचकिचाहट महसूस न होगी । दुनिया की जिंदगी का लाभ , संतुलन, सुख , शांति आखिरत के अक़ीदे को मानने पर निर्भर है। आखिरत की जिंदगी के कल्पना के बिना इंसान और जानवर की जिंदगी में कोई अंतर बाकी नहीं रह जाता । आखिरत के अक़ीदे का असर इंसान में इतना ज्यादा होता है कि वह नेक कामों के करने के साथ-साथ लोगों को नेक काम करने का हुक्म भी देता है । खुद बुराइयों से बचता है और लोगों को बुरा करने से भी रोकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *