Home Breaking News SIR में समन्वय की कमी से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी, वृद्ध और...

SIR में समन्वय की कमी से मतदाताओं की बढ़ी परेशानी, वृद्ध और बीमार सबसे ज्यादा प्रभावित

4

BLO की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, मैपिंग और फॉर्म भरने की प्रक्रिया में एकरूपता नहीं होने का आरोप

नागपुर। महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान कुछ क्षेत्रों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) की कार्यप्रणाली को लेकर मतदाताओं में नाराजगी और भ्रम की स्थिति सामने आई है। आरोप है कि चुनाव आयोग के घर-घर जाकर SIR फॉर्म भरवाने के निर्देशों के बावजूद कुछ BLO ने निर्धारित तरीके से काम नहीं किया। इसका सबसे अधिक असर वृद्ध, बीमार, दिव्यांग और अशिक्षित मतदाताओं पर पड़ने की बात कही जा रही है।

बताया गया कि कई स्थानों पर BLO द्वारा घर-घर जाने के बजाय एक ही स्थान पर बैठकर प्रक्रिया पूरी की गई। ऐसे में जो मतदाता बीमारी या उम्र के कारण घर से बाहर निकलने में असमर्थ थे, उनके सामने मैपिंग और SIR फॉर्म भरने की समस्या खड़ी हो गई। कुछ मतदाताओं का दावा है कि उनकी मैपिंग तक नहीं हो पाई और उन्हें यह जानकारी भी नहीं मिल सकी कि उनके नाम से प्रक्रिया पूरी हुई है या नहीं।

फॉर्म और दस्तावेज को लेकर भी अलग-अलग प्रक्रिया

मतदाताओं के बीच उस समय भी भ्रम की स्थिति बनी जब अलग-अलग क्षेत्रों में BLO द्वारा अलग-अलग तरीके अपनाए गए। कहीं एक फॉर्म दिया गया तो कहीं दो फॉर्म दिए गए। कुछ जगह हस्ताक्षर कराने के बाद फोटो लेने की बात कही गई, जबकि कुछ स्थानों पर बिना हस्ताक्षर के फोटो या जेरॉक्स लेने को कहा गया। प्रक्रिया में इस तरह की कथित असमानता से आम मतदाता यह समझ नहीं पा रहा कि सही प्रक्रिया आखिर है क्या।

ईमानदारी से प्रक्रिया पूरी करने वालों को भी संदेशों से चिंता

सबसे गंभीर चिंता उन मतदाताओं को लेकर सामने आई है, जिन्होंने 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम तलाशने से लेकर मैपिंग और SIR फॉर्म की प्रक्रिया तक पूरी करने के लिए समय और मेहनत लगाई। इसके बावजूद कुछ मतदाताओं को सिस्टम की ओर से ऐसे संदेश प्राप्त हो रहे हैं कि उनका नाम मसौदा सूची में शामिल होने की संभावना है और अतिरिक्त सत्यापन की आवश्यकता हो सकती है।

मतदाताओं का कहना है कि जब उन्होंने आयोग द्वारा बताई गई प्रक्रिया के अनुसार अपना काम पूरा किया है, तो ऐसे संदेश उन्हें अनावश्यक चिंता और असमंजस में डाल रहे हैं।

मसौदा सूची के बाद आयोग की जिम्मेदारी बढ़ी

अब मसौदा मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद उन मतदाताओं की जिम्मेदारी और बढ़ गई है, जिन्हें अतिरिक्त सत्यापन के लिए नोटिस जारी किया जाएगा। ऐसे लोगों को अपने नाम और दस्तावेजों को लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसी चरण को लेकर यह मांग उठाई जा रही है कि आयोग की ओर से मतदाताओं को स्पष्ट और सरल जानकारी उपलब्ध कराई जाए, ताकि वैध मतदाता किसी तकनीकी या प्रक्रियागत परेशानी के कारण अपने मताधिकार से वंचित न हो।

जमाअ़ते इस्लामी हिंद ने दिए सुझाव

इस संबंध में जमाअ़ते इस्लामी हिंद, नागपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. एम. ए. रशीद ने चुनाव आयोग से कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने का सुझाव दिया है।

उन्होंने कहा कि अतिरिक्त सत्यापन के लिए जारी किए जाने वाले नोटिस की भाषा सरल हिंदी और मराठी में होनी चाहिए, ताकि हर मतदाता उसे आसानी से समझ सके। साथ ही दस्तावेज जमा करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन मतदाताओं की मैपिंग हो चुकी है, लेकिन किसी विसंगति के कारण उनका नाम सूची में शामिल नहीं हो पाया है, ऐसे मामलों में आवश्यक जांच के बाद उनके नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाएं। जरूरत पड़ने पर मसौदा सूची के प्रकाशन के बाद पूरक सूची जारी कर नाम जोड़े जा सकते हैं।

वृद्ध और बीमार मतदाताओं के लिए घर पर सुविधा की मांग

डॉ. रशीद ने वृद्ध, बीमार और दिव्यांग मतदाताओं को विशेष सुविधा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे मतदाताओं से दस्तावेज लेने के लिए BLO स्वयं उनके घर जाएं। उन्हें केवल दस्तावेज जमा करने के लिए ERO कार्यालय के चक्कर लगाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

इसके अलावा दावा-आपत्ति की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए वार्ड स्तर पर विशेष सहायता शिविर लगाए जाने का सुझाव दिया गया है। इन शिविरों के माध्यम से मतदाताओं को नाम की स्थिति, दस्तावेज और दावा-आपत्ति की प्रक्रिया की जानकारी दी जा सकती है।

जमाअ़ते इस्लामी हिंद ने जोर दिया कि SIR जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में एकरूपता, पारदर्शिता और मानवीय दृष्टिकोण जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र नागरिक का नाम केवल प्रक्रिया संबंधी कमी या जानकारी के अभाव में मतदाता सूची से बाहर न हो।