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संविधान के तीन स्तंभों को व्यवहार में उतारने का समय : डॉ. एम. ए. रशीद, नागपुर

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संविधान के तीन स्तंभों को व्यवहार में उतारने का समय : डॉ. एम. ए. रशीद, नागपुर

भारत की आत्मा उसके संविधान में बसती है और संविधान की आत्मा धर्मनिरपेक्षता, समानता और बंधुत्व जैसे मूल्यों में दिखाई देती है। स्वतंत्रता के 80 वर्ष पूरे होने के बाद भी आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इन संवैधानिक मूल्यों को समाज में और अधिक प्रभावी तथा मजबूत कैसे बनाया जाए। नागपुर के डॉ. एम. ए. रशीद का मानना है कि केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इन सिद्धांतों को लोगों के व्यवहार और जीवनशैली का हिस्सा बनाना होगा।

धर्मनिरपेक्षता भारत की पहचान है

डॉ. रशीद के अनुसार, धर्मनिरपेक्षता का अर्थ सभी धर्मों का सम्मान करना है। भारतीय संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता दी है और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।

उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता को मजबूत बनाने के लिए संविधान और कानून का सख्ती से पालन होना चाहिए। इसके साथ ही समाज में जागरूकता बढ़ाने के लिए स्कूलों और कॉलेजों में प्रतिदिन प्रार्थना के बाद संविधान की प्रस्तावना का पाठ कराया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को यह समझाया जा सके कि “हम भारत के लोग” केवल एक वाक्य नहीं, बल्कि देश की एकता का आधार है।

उन्होंने सुझाव दिया कि शिक्षा के पाठ्यक्रम में सभी धर्मों के संतों, सूफियों, गुरुओं और समाज सुधारकों के जीवन और विचारों को शामिल किया जाना चाहिए। इससे नई पीढ़ी में नैतिकता, सहिष्णुता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित होगी।

धार्मिक आस्थाओं का सम्मान जरूरी

डॉ. रशीद का कहना है कि विज्ञान देश को प्रगति के नए आयाम तक पहुंचा सकता है, लेकिन लोगों के दिलों को जोड़ने का काम केवल आपसी सम्मान और धार्मिक सहिष्णुता से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता के सामने सबसे बड़ा खतरा झूठ और भ्रामक जानकारी है। मीडिया और सोशल मीडिया को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। किसी भी वीडियो या संदेश को साझा करने से पहले उसकी सत्यता की जांच करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि समाज में नफरत फैलाने वाली सामग्री के बजाय ऐसे लोगों की कहानियों को आगे लाना चाहिए, जो समाज को जोड़ने का काम कर रहे हैं।

आर्थिक समानता के बिना सामाजिक समानता अधूरी

डॉ. रशीद ने कहा कि आर्थिक असमानता सांप्रदायिकता की एक बड़ी वजह है। इसलिए पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचना चाहिए।

उन्होंने कहा कि तिरंगे की सफेद पट्टी शांति और धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक है और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी नागरिकों को यह संकल्प लेना चाहिए कि इस रंग की भावना को कभी कमजोर नहीं होने देंगे।

समानता केवल संविधान की किताबों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए

डॉ. रशीद ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत ही “हम भारत के लोग” और समानता के संकल्प से होती है। इसके बावजूद आज भी समाज में कई प्रकार की असमानताएं मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि समानता का पहला अर्थ कानून और शासन में बराबरी है। कानून की नजर में सभी नागरिक समान होने चाहिए और प्रत्येक व्यक्ति को निष्पक्ष न्याय मिलना चाहिए। सरकारी योजनाओं, नौकरियों और टेंडर प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

शिक्षा में समान अवसर सबसे जरूरी

उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में असमानता सबसे अधिक दिखाई देती है। अच्छी शिक्षा केवल संपन्न लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। सरकारी स्कूलों को मजबूत बनाना होगा और निजी स्कूलों की महंगी फीस गरीब बच्चों के अधिकारों को प्रभावित नहीं करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि जिस दिन मजदूर और अधिकारी के बच्चे एक साथ बैठकर समान शिक्षा प्राप्त करेंगे, उसी दिन वास्तविक समानता की शुरुआत होगी।

स्वास्थ्य और सामाजिक व्यवस्था में भी दिखे समानता

डॉ. रशीद ने कहा कि गांवों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी शहरों के बड़े अस्पतालों जैसी सुविधाएं और योग्य चिकित्सक उपलब्ध होने चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून कागजों पर समानता स्थापित कर सकता है, लेकिन समाज में समानता लाने के लिए लोगों की सोच बदलनी होगी। छुआछूत और भेदभाव जैसी कुरीतियों को पूरी तरह समाप्त करना होगा।

उन्होंने कहा कि मंदिरों, कुओं और सार्वजनिक स्थलों के दरवाजे सभी लोगों के लिए खुले होने चाहिए।

महिलाओं को मिले बराबरी का अधिकार

उन्होंने कहा कि लिंग के आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता। बेटियों को पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार मिलना चाहिए।

उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई बार परिवार के लोग ही महिलाओं के अधिकारों का हनन करते हैं। महिलाओं की राय और निर्णय का सम्मान करना भी समानता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि सफाईकर्मी, ड्राइवर और मजदूर जैसे श्रमिकों को सम्मान देना भी सामाजिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।उन्होंने डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि राजनीतिक समानता तब तक अधूरी है, जब तक समाज में सामाजिक समानता स्थापित नहीं हो जाती।

भूख और बेरोजगारी भी असमानता की वजह

डॉ. रशीद ने कहा कि भूख और बेरोजगारी असमानता को बढ़ावा देती है। इसलिए प्रत्येक नागरिक को रोटी, कपड़ा, मकान और रोजगार उपलब्ध कराना सरकार और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरियों, पंचायतों और कॉरपोरेट संस्थाओं में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्गों और अल्पसंख्यकों की भागीदारी बढ़ाई जानी चाहिए।

बंधुत्व ही भारत की सबसे बड़ी ताकत

डॉ. रशीद ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना का अंतिम शब्द बंधुत्व है और यही भारत की एकता की सबसे बड़ी शक्ति है।उन्होंने कहा कि भारत 140 करोड़ लोगों का देश है, जहां 22 भाषाएं, 9 धर्म और हजारों परंपराएं मौजूद हैं। इतनी विविधता के बावजूद देश एकजुट है, क्योंकि यहां बंधुत्व की भावना जीवित है।उन्होंने कहा कि स्कूलों और कॉलेजों में खेल, सांस्कृतिक कार्यक्रम और सामूहिक गतिविधियों के माध्यम से भाईचारे को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

आपसी संवाद से मजबूत होगा भाईचारा

उन्होंने कहा कि पड़ोसियों के बीच मेलजोल, एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना, बच्चों का साथ खेलना और सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बंधुत्व को मजबूत बनाती है।रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण अभियान और सामाजिक सेवा जैसे कार्यक्रम समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।उन्होंने कहा कि छोटी-छोटी बातों के कारण अक्सर रिश्तों में दूरी आ जाती है। जमीन के विवाद, अहंकार और गुस्सा सामाजिक संबंधों को कमजोर करते हैं।उन्होंने तिरंगे के अशोक चक्र का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार 24 तीलियों में से एक भी कमजोर हो जाए तो चक्र प्रभावित होता है, उसी प्रकार समाज के किसी एक वर्ग की उपेक्षा पूरे देश को कमजोर कर सकती है।

15 अगस्त पर लें यह संकल्प

डॉ. एम. ए. रशीद ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सभी देशवासियों से संकल्प लेने का आह्वान करते हुए कहा कि धर्म व्यक्ति का निजी विषय है, लेकिन बंधुत्व प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।उन्होंने कहा कि यदि धर्मनिरपेक्षता, समानता और बंधुत्व को व्यवहार में उतार दिया जाए, तो भारत और अधिक मजबूत, समृद्ध और महान राष्ट्र बन सकता है।

सभी देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।

जय हिंद। 🇮🇳