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जेनरिक दवाओं की कीमतों का खेल! ₹257 की दवा ₹50 में, ₹85 की दवा कहीं ₹85 तो कहीं ₹60 में

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जेनरिक दवाओं की कीमतों का खेल! ₹257 की दवा ₹50 में, ₹85 की दवा कहीं ₹85 तो कहीं ₹60 में एक ही जेनरिक दवा की अलग-अलग कीमतों ने उठाए सवाल, आखिर मरीज से सही कीमत कौन-सी वसूली जा रही है?

सरकार का दावा है कि जेनरिक दवाएं आम जनता को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराने का माध्यम हैं। लेकिन बाजार में जेनरिक दवाओं की कीमतों में भारी अंतर कई सवाल खड़े कर रहा है।

हाल ही में सामने आए उदाहरणों में Methylcobalamin जेनरिक दवा की MRP ₹257 अंकित है, जबकि वही दवा मेडिकल स्टोर पर सिर्फ ₹50 में उपलब्ध हो गई। यदि ₹257 की दवा ₹50 में बेची जा सकती है, तो इतनी ऊंची MRP तय करने का आधार क्या है?

इसी तरह Povidone-Iodine 5% Powder (Cipladine) की MRP ₹85 है। कई मेडिकल स्टोर इसे पूरे ₹85 में बेच रहे हैं, जबकि कुछ दुकानों पर यही दवा ₹60 में मिल रही है। यानी एक ही दवा के लिए अलग-अलग मरीज अलग-अलग कीमत चुका रहे हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि क्या जेनरिक दवाओं का लाभ वास्तव में आम जनता तक पहुंच रहा है, या फिर ऊंची MRP और भारी छूट के खेल में सबसे ज्यादा फायदा बीच के कारोबारियों को हो रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि जेनरिक दवाओं की कीमतों में पारदर्शिता जरूरी है। सरकार, NPPA और औषध विभाग को इस व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए, ताकि हर मरीज को एक ही दवा उचित और समान कीमत पर मिल सके। गरीब और मध्यम वर्ग को सस्ती दवा उपलब्ध कराना ही जेनरिक दवाओं का मूल उद्देश्य है।