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इंजीनियरिंग छात्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ‘बोपची’ जनजाति का दावा माना सही; ST वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश

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इंजीनियरिंग छात्रा को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत, ‘बोपची’ जनजाति का दावा माना सही; ST वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश

नागपुर: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने अनुसूचित जनजाति (ST) वैधता से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में इंजीनियरिंग छात्रा वैष्णवी रामदास कुयाटे को बड़ी राहत देते हुए अमरावती की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र छाननी समिति का आदेश रद्द कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि वैष्णवी ‘बोपची’ अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं और समिति को दो सप्ताह के भीतर उन्हें ST वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया।

यह फैसला माननीय न्यायमूर्ति उर्मिला जोशी-फलके और माननीय न्यायमूर्ति निवेदिता पी. मेहता की खंडपीठ ने रिट याचिका क्रमांक 3060/2024 में सुनाया।

क्या था मामला?

वैष्णवी कुयाटे ने वर्ष 2021 में अनुसूचित जनजाति वर्ग के तहत इंजीनियरिंग में प्रवेश लिया था। इसके बाद उनके जाति प्रमाणपत्र की जांच अमरावती की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र छाननी समिति के पास भेजी गई। समिति ने 16 मार्च 2022 को उनके ‘बोपची’ जनजाति के दावे को खारिज कर दिया। समिति का कहना था कि परिवार के कुछ पुराने दस्तावेजों में रिश्तेदारों की जाति “कुनबी” और “मराठा” दर्ज है, इसलिए उनका दावा स्वीकार नहीं किया जा सकता।

हाई कोर्ट ने क्या माना?

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत के सामने ऐसे दस्तावेज पेश किए, जिनसे पता चला कि उनकी सगी बुआ और चचेरी बहन को पहले ही ‘बोपची’ अनुसूचित जनजाति का वैधता प्रमाणपत्र मिल चुका है। इसके अलावा वर्ष 1942 का संविधान-पूर्व सरकारी रिकॉर्ड भी पेश किया गया, जिसमें उनके पूर्वज की जाति ‘बोपची’ दर्ज थी।

हाई कोर्ट ने कहा कि छाननी समिति ने इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों और परिवार के सदस्यों को पहले से जारी वैधता प्रमाणपत्रों को उचित महत्व नहीं दिया। अदालत ने यह भी कहा कि केवल Affinity Test (सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान परीक्षण) के आधार पर किसी व्यक्ति का जनजातीय दावा खारिज नहीं किया जा सकता, जब उसके पक्ष में मजबूत दस्तावेजी साक्ष्य उपलब्ध हों।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला

खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी व्यक्ति के निकट रक्त संबंधी को विधिवत जांच के बाद जाति वैधता प्रमाणपत्र मिल चुका है, तो उसी परिवार के दूसरे सदस्य के दावे पर भी उसका महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में छाननी समिति बिना ठोस और कानूनी कारण बताए अलग निर्णय नहीं ले सकती।

दो सप्ताह में प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश

हाई कोर्ट ने 16 मार्च 2022 के आदेश को रद्द करते हुए घोषित किया कि वैष्णवी रामदास कुयाटे ‘बोपची’ अनुसूचित जनजाति से संबंधित हैं। अदालत ने अमरावती की अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र छाननी समिति को दो सप्ताह के भीतर ST वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही यह भी कहा कि प्रमाणपत्र जारी होने तक याचिकाकर्ता इस फैसले की प्रति का उपयोग सभी वैधानिक उद्देश्यों के लिए कर सकेंगी।

अधिवक्ता सैय्यद शाहिद ने की पैरवी

इस मामले में याचिकाकर्ता वैष्णवी रामदास कुयाटे की ओर से अधिवक्ता सैय्यद शाहिद ने प्रभावी पैरवी की। उनके पक्ष में प्रस्तुत दस्तावेजों और कानूनी तर्कों से सहमत होते हुए हाई कोर्ट ने छात्रा के पक्ष में फैसला सुनाया और ST वैधता प्रमाणपत्र जारी करने का आदेश दिया। �