महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण हेतु नारी शक्ति वंदन अधिनियम का आरक्षण प्रावधान शीघ्र लागू हो
नागपुर में महिला संगठनों का प्रदर्शन, जिलाधिकारी को सौंपा प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन
नागपुर: संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33 प्रतिशत) आरक्षण का प्रावधान करने वाले भारत के संविधान (106वें संशोधन) अधिनियम, 2023 अर्थात ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को तत्काल लागू करने की मांग को लेकर शनिवार को नागपुर में विभिन्न महिला संगठनों ने संविधान चौक पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया कि देशभर के महिला संगठनों, महिला नेटवर्क, नागरिक समाज संगठनों और जागरूक नागरिकों के राष्ट्रीय गठबंधन की ओर से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को बिना किसी देरी के लागू करने की मांग की जा रही है। संगठनों का कहना है कि वर्तमान कानून में आरक्षण को जनगणना और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (डिलिमिटेशन) से जोड़ दिया गया है, जबकि महिलाओं के आरक्षण का मुद्दा अलग है और इसे किसी अन्य राजनीतिक प्रक्रिया से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
महिला संगठनों ने कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में इस विषय पर विधेयक लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में जनगणना और परिसीमन से जुड़ी शर्त को हटाने के लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन किया जाए, ताकि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण तत्काल लागू किया जा सके।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्तमान में देश की राज्य विधानसभाओं में महिलाओं का औसत प्रतिनिधित्व 10 प्रतिशत से भी कम है। अगले एक वर्ष में कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व में समान अवसर देने के लिए आरक्षण को तत्काल लागू करना आवश्यक है।
महिला संगठनों ने कहा कि महिलाओं के आरक्षण का उपयोग किसी अन्य राजनीतिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए स्वीकार नहीं किया जाएगा और वे इसका विरोध करते हैं। उन्होंने मांग की कि महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने के लिए संविधान के 106वें संशोधन में आवश्यक बदलाव कर आरक्षण का प्रावधान तुरंत लागू किया जाए।
इस आंदोलन में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति विकास परिषद (महिला), महाराष्ट्र की अध्यक्ष संघमित्रा ढोके, महासचिव मृणालिनी दहिवडे, दिपाली पाटील, माया पाटील, मनीषा जामगडे, अखिल भारतीय जनवादी महिला संघटना की मंगला जुनघरे, पुष्पा नंदेश्वर, अंजली तिरपुडे, अंजली धारगावे, संवैधानिक महिला संघटना, स्त्री हक्क जागर, जिजाऊ ब्रिगेड, संवैधानिक ओबीसी महिला महासंघ, सावित्री ब्रिगेड, कबीरवाली संघटना, संबुद्ध महिला संघटना, 1942 महिला क्रांति परिषद, भारतीय बौद्ध महासभा, ओबीसी वकील महासंघ सहित अनेक संगठनों की पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहीं।
कार्यक्रम में एड. सुषमा भड, डॉ. स्मिता मेहत्रे, अर्चना बरडे, छाया खोब्रागडे, प्रा. बीना नगरारे, मोनाली अपर्णा, पुष्पा बौद्ध, एड. रेखा बारहाते, अपेक्षा दिवाण, माधव जांभुळे, सीमा शेख, जयमाला वरवाडे, मीरा मदनकर, साधना बोरकर, कुमुद गुडघे, कांचन गुडघे, अवंतिका लेकुरवाले, परीक्षा जोढ़ापे, नंदा गाणार, ज़ाहेदा अंसारी, डॉ. ग़ज़ाला, शबाना खान, तसलीम कौसर, डॉ. सबीहा खान, अंबरीन नाज़, अंबरीन अहमद, शबीना अहमद, हलीमा बानो और फ़ातेमा शेख सहित बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।

महिला सद्भावना मंच, नागपुर दक्षिण एवं मध्य ने भी आंदोलन में सक्रिय भागीदारी करते हुए महिला आरक्षण के समर्थन में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के अंत में सभी संगठनों ने एक स्वर में मांग की कि महिला आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए, ताकि महिलाओं को राजनीतिक नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी सुनिश्चित हो सके।









