मध्य प्रदेश की सविता प्रधान की जिंदगी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं, लेकिन यह हकीकत है—दर्द, अपमान और संघर्ष से भरी हुई।
महज 16 साल की उम्र में उनकी शादी कर दी गई थी। शादी के बाद उनका जीवन अत्याचार का दूसरा नाम बन गया। पति द्वारा सार्वजनिक रूप से बेइज्जती करना, मारपीट करना और मानसिक प्रताड़ना देना रोजमर्रा की बात हो गई थी। ससुराल में उन्हें नौकरों जैसा व्यवहार झेलना पड़ता था। कई बार उन्हें ठीक से खाना भी नहीं दिया जाता था।
इतनी बदतर स्थिति थी कि सविता को रोटी छिपाकर बाथरूम में जाकर खाना पड़ता था ताकि कोई देख न ले।
समय के साथ अत्याचार बढ़ता गया। छोटी-छोटी बातों पर उन्हें बेरहमी से पीटा जाता था। उनके शरीर पर चोटों के निशान, जले हुए हिस्से और कट के घाव उनकी हालत बयां करते थे।
⚠️ फांसी लगाने तक पहुंच गई थीं
हालात इतने खराब हो गए कि एक दिन उन्होंने अपनी जिंदगी खत्म करने का फैसला कर लिया।
उन्होंने अपने बच्चों को सुलाया, उन्हें आखिरी बार चूमा और पंखे पर साड़ी बांधकर फांसी लगाने की तैयारी कर ली।
उसी वक्त खिड़की से उनकी सास ने उन्हें देखा—लेकिन रोकने की बजाय बिना किसी प्रतिक्रिया के वहां से चली गईं।
यही पल उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बना। उन्होंने फैसला किया कि वे ऐसे लोगों के लिए अपनी जान नहीं देंगी।
इसके बाद उन्होंने हिम्मत जुटाई और ससुराल छोड़कर भाग निकलीं।
⚠️ पेशाब फेंककर किया अपमान
लेकिन संघर्ष यहीं खत्म नहीं हुआ। अलग होने के बाद भी उनका पति उन्हें परेशान करता रहा।
एक दिन, जब वे परीक्षा देने जा रही थीं, उनके पति ने बच्चों के सामने उन्हें पीटा और एक बाल्टी में पेशाब करके उनके ऊपर फेंक दिया।
इस अपमान के बावजूद सविता ने हार नहीं मानी। उन्होंने दोबारा नहाया, कपड़े बदले और उसी हालत में जाकर परीक्षा दी।
🎯 संघर्ष से सफलता तक का सफर
ससुराल छोड़ने के बाद उन्होंने पार्लर में काम किया, ट्यूशन पढ़ाया और बच्चों की परवरिश करते हुए अपनी पढ़ाई जारी रखी।
उनकी मेहनत रंग लाई—
पहले ही प्रयास में मध्य प्रदेश पीसीएस परीक्षा पास की
इसके बाद UPSC CSE 2017 में भी सफलता हासिल की
आज सविता प्रधान एक IAS अधिकारी हैं।
🌟 आज क्या कर रही हैं
आज वे अपने पद का इस्तेमाल समाज की कमजोर और गरीब महिलाओं की मदद के लिए कर रही हैं।
उनका लक्ष्य है कि कोई भी महिला उस दर्द से न गुजरे, जिससे वे गुजरी हैं।







