नागपुर। उत्तर-पश्चिम नागपुर स्थित रियाज काजी से जुड़े एक NGO विवाद में नया मोड़ सामने आया है। संस्था प्रमुख पर लगे यौन उत्पीड़न, धर्मांतरण के लिए दबाव, छेड़छाड़ और दुर्व्यवहार जैसे गंभीर आरोपों के बीच, संस्था की एक महिला कर्मचारी ने पुलिस के समक्ष बयान दर्ज कर इन सभी आरोपों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और बिना किसी प्रमाण का बताया है।
महिला कर्मचारी, जो जुलाई 2024 से संस्था से जुड़ी हैं, ने बताया कि उन्होंने संस्था प्रमुख के साथ लंबे समय तक काम किया है—ऑफिस संचालन, फील्ड विजिट, ट्रेन यात्रा और दूसरे शहरों में आधिकारिक कार्य के दौरान भी। उन्होंने कहा कि कभी भी उन्हें असुरक्षा या अनुचित व्यवहार का अनुभव नहीं हुआ
उन्होंने कहा,
“न कभी गलत स्पर्श हुआ, न आपत्तिजनक बातचीत—molestation के आरोप पूरी तरह झूठे हैं।”
धर्मांतरण के आरोप भी सिरे से खारिज
महिला ने स्पष्ट कहा कि संस्था में अधिकांश कर्मचारी हिंदू हैं और किसी पर भी नमाज, रोज़ा या धर्म परिवर्तन का कोई दबाव नहीं डाला गया।
“वे अपने धार्मिक नियमों का पालन करते थे, लेकिन कभी किसी कर्मचारी पर कुछ नहीं थोपा,” उन्होंने कहा।
डिसिप्लिनरी एक्शन से जुड़ा विवाद
महिला कर्मचारी के अनुसार, शिकायतकर्ता के खिलाफ पहले से अनुशासनात्मक कार्रवाई चल रही थी।
👉 2 अप्रैल 2025 को शिकायतकर्ता को disciplinary warning letter जारी किया गया था।
👉 इसके जवाब में शिकायतकर्ता ने 7 अप्रैल 2025 को लिखित उत्तर दिया, जिसमें सुधार का आश्वासन दिया गया।
महिला ने बताया कि लगातार absenteeism, half-days और attendance issues के कारण यह कार्रवाई की गई थी और दूसरी चेतावनी की तैयारी भी चल रही थी।
उन्होंने कहा,
“संभव है कि नौकरी जाने के डर से यह मामला खड़ा किया गया हो।”
बाहरी दबाव का आरोप
महिला ने यह भी दावा किया कि धर्मांतरण का मुद्दा बाहरी दबाव में उछाला गया। उनके अनुसार, शिकायतकर्ता ने निजी बातचीत में धर्मांतरण की बात से इनकार किया था, लेकिन बाद में बाहरी संगठनों के दबाव में मामला बढ़ा।
संस्था प्रमुख के व्यवहार पर सफाई
महिला ने कहा कि संस्था प्रमुख हमेशा महिला कर्मचारियों के साथ सम्मानजनक दूरी बनाए रखते थे।
“मैंने कभी नहीं देखा कि उन्होंने किसी महिला कर्मचारी से हाथ मिलाकर greeting की हो,” उन्होंने कहा।
आर्थिक मदद और सहयोग का जिक्र
महिला कर्मचारी ने बताया कि संस्था प्रमुख जरूरतमंद कर्मचारियों की आर्थिक मदद भी करते थे और एक कर्मचारी के accident के दौरान policy के बावजूद उसकी salary नहीं काटी गई।
शिकायतकर्ता के व्यवहार में बदलाव का दावा
महिला ने कहा कि पिछले एक साल में शिकायतकर्ता के व्यवहार, social circle और काम के प्रति रवैये में बदलाव आया था, जिसका असर ऑफिस discipline पर पड़ा।
एक गलती स्वीकार, लेकिन आरोपों से इनकार
महिला ने यह माना कि संस्था प्रमुख ने कुछ मौकों पर शिकायतकर्ता की lifestyle को लेकर कठोर शब्दों का इस्तेमाल किया हो सकता है, लेकिन इसे यौन उत्पीड़न या छेड़छाड़ कहना गलत है।
स्टाफ का समर्थन, लेकिन सामने आने में हिचक
महिला के अनुसार, संस्था का अन्य स्टाफ भी संस्था प्रमुख के पक्ष में है, लेकिन मीडिया ट्रायल और करियर के डर से सामने नहीं आ रहा।
निष्पक्ष जांच की मांग
महिला कर्मचारी ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच की जाए तो सच्चाई सामने आ जाएगी।
“बिना प्रमाण इतने गंभीर आरोप लगाना संस्था और व्यक्ति दोनों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है,” उन्होंने कहा।








