संक्षेप में
नागपुर से मुंबई CSMT जाने वाली समर स्पेशल ट्रेन 02142 अपने शुरुआती स्टेशन नागपुर से ही करीब 8 घंटे देरी से रवाना हुई, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। रात की आरामदायक यात्रा दिन की तेज गर्मी और अव्यवस्था में बदल गई। घंटों प्लेटफॉर्म पर इंतजार कर रहे यात्रियों में रेलवे प्रशासन के प्रति नाराज़गी देखी गई।
सारांश
नागपुर से मुंबई छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) के बीच चलने वाली समर स्पेशल ट्रेन 02142 को उसके निर्धारित समय रात 8 बजे की बजाय लगभग 8 घंटे देरी से रवाना किया गया। हैरानी की बात यह रही कि ट्रेन अपने शुरुआती स्टेशन नागपुर से ही समय पर नहीं चल सकी। आमतौर पर ट्रेनें रास्ते में तकनीकी या परिचालन कारणों से लेट होती हैं, लेकिन शुरुआत से ही इतनी बड़ी देरी ने रेलवे व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ट्रेन के इंतजार में छोटे बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और दूर-दराज़ से आए यात्री पूरी रात प्लेटफॉर्म पर बैठे रहे। रात में आराम से सफर करने की उम्मीद लेकर पहुंचे यात्रियों को सुबह और दिन की भीषण गर्मी में यात्रा शुरू करनी पड़ी। कई यात्रियों को खाने-पीने, आराम और जरूरी सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ा।
इस देरी का असर यात्रियों की पूरी यात्रा योजना पर पड़ा। कई लोगों की होटल बुकिंग, इंटरव्यू, परीक्षा, मेडिकल अपॉइंटमेंट और व्यावसायिक मीटिंग प्रभावित हुईं, जबकि कुछ यात्रियों की आगे की ट्रेन, बस और फ्लाइट छूटने की नौबत आ गई। कई परिवारों ने मजबूरी में अपनी यात्रा तक रद्द कर दी, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ा।
सिटीजन जर्नलिस्ट एवं जमाअत ए इस्लामी हिंद नागपुर के मीडिया प्रभारी डॉ. एम. ए. रशीद ने इस मामले को गंभीर बताते हुए रेलवे प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि स्पेशल ट्रेनों का उद्देश्य यात्रियों को राहत और सुविधा देना होना चाहिए, लेकिन इस प्रकार की लापरवाही यात्रियों के लिए मानसिक और शारीरिक परेशानी का कारण बन रही है।
डॉ. रशीद ने मांग की कि प्रत्येक स्पेशल ट्रेन का रेक कम से कम 12 घंटे पहले स्टेशन पर तैयार रखा जाए, ताकि यात्रियों को अनिश्चितता और घंटों की देरी का सामना न करना पड़े। उन्होंने महाप्रबंधक, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक और स्टेशन प्रशासन से भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस व्यवस्था करने की अपील की।









