Nagpur Violence : सुनवाई के लिए रात्रि दो बजे तक खुला रहा कोर्ट,पुलिस ने 27 आरोपियों को किया पेश

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नागपुर /जिला सत्र न्यायालय, न्यायपालिका के इतिहास में कई साल बाद ऐसा देखने को मिला कि सत्र न्यायालय में रात 2:00 बजे तक सुनवाई चलती रही जब नागपुर सो रहा था तब सत्र न्यायालय में दलीलों का दौर जारी था.विस्तारनागपुर में हुई हिंसा के बाद से इलाके में तनाव का माहौल है। महल इलाके में बड़े स्तर पर हिंसा को अंजाम दिया गया है। इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात हैं और कई क्षेत्रों में कर्फ्यू घोषित कर दिया गया है। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार भी कर रही है.गणेशपेठ पुलिस ने मंगलवार को महाल दंगा मामले में 51 आरोपियों में से 27 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) के समक्ष पेश किया। ( सभी आरोपीय विशेष समुदाय के थे) भियोजन पक्ष द्वारा आरोपियों के बयान दर्ज करने के साथ ही अदालती कार्यवाही आधी रात तक जारी रही। पुलिस ने संदिग्धों से आगे की पूछताछ के लिए सात दिन की पुलिस हिरासत रिमांड (पीसीआर) मांगी थी। लेकिन कोर्ट ने चार आरोपियों को मजिस्ट्रेट कस्टडी रिमांड जेल भेजा (एम सीआर) बाकी 23 आरोपियों का 2 दिन का पीसीआर दिया, पूर्व जिला सरकारी वकील आसिफ कुरैशी ने लोकमंच टुडे को बताया कि 10 आरोपियों की तरफ से पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए गए पुलिस ने कस्टडी में आरोपियों को यातनाएं दी, कुछ आरोपियों को पुलिस ने इतना मारा के शरीर के कुछ हिस्सों में गंभीर चोटे भी हो सकती हैं? इस बात को कोर्ट ने सही माना और आदेश दिया.वकील रफीक अकबानी ने कोर्ट को बताया कि गिरफ्तार किए गए लोगों में से कई की दंगों में कोई भूमिका नहीं थी। असली अपराधी बाहरी लोग थे, न कि भालदारपुरा के स्थानीय निवासी। कई अधेड़ उम्र के लोगों को हिरासत में लिया गया, हालांकि हिंसा ज्यादातर युवा व्यक्तियों द्वारा की गई थी।यह सभी वकील दीपेत्र जिज्ञासी, वकील आदिल खान वकील चौहान व अन्य मौजूद थे.