नागपुर।इस्लाम ने महिलाओं और पुरुषों—दोनों को समान दर्जा दिया है। ईमान वाले पुरुष और ईमान वाली महिलाएं एक-दूसरे के साथी हैं और दोनों को बराबर इनाम मिलेगा। पैग़ंबर हज़रत मुहम्मद ﷺ ने कभी किसी महिला की तुलना दूसरी महिला से नहीं की। महिलाओं को चाहिए कि वे अल्लाह की तय की गई सीमाओं के भीतर रहते हुए अपनी भावनाओं और ज़िम्मेदारियों को निभाएं, क्योंकि “इस्लाम ही ऐसा धर्म है जो इंसान को अतिसुंदर रंग और ढंग दे सकता है।”ये विचार जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद (जेआईएच) की राज्य सहायक सचिव डॉ. ख़ान मुबाशिरा फ़िरदौस ने व्यक्त किए।महिलाओं के लिए आयोजित इस विशाल सिटी कॉन्फ़्रेंस का आयोजन जमाअ़त-ए-इस्लामी हिंद, नागपुर महिला विभाग और गर्ल्स इस्लामिक ऑर्गनाइज़ेशन (GIO) के संयुक्त तत्वावधान में जाफ़र नगर स्थित ईदगाह ग्राउंड में “तुम ही से रोशन सवेरा होगा” विषय पर किया गया, जिसे भारी प्रतिसाद मिला।डॉ. फ़िरदौस ने कहा कि आज की सबसे बड़ी चुनौती आने वाली पीढ़ियों को सदाचार और शिष्टता की शिक्षा देना है। हमें सामूहिक रूप से रहते हुए अपने घरों को इस्लाम आधारित शिक्षाओं से रोशन करना होगा। सामाजिक जीवन में बिना किसी धार्मिक भेदभाव के हर व्यक्ति की विद्वता और क़ाबिलियत का सम्मान किया जाना चाहिए।ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की कन्वीनर जलीसा सुल्ताना यास्मीन ने कहा कि 16वीं शताब्दी तक महिलाओं को इंसान होने का भी पूरा अधिकार नहीं मिला था। ग्रीक और रोमन सभ्यताओं सहित कई धार्मिक प्रथाओं में महिलाओं को बदकिस्मती और शैतान की जड़ माना गया। जब महिलाओं ने अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और सशक्तिकरण की बात उठाई, तो पश्चिम ने बेलगाम स्वतंत्रता के नाम पर नग्नता और अनैतिकता को बढ़ावा दिया, जिसका परिणाम आज समाज के सामने तबाही के रूप में दिखाई दे रहा है।सवाएमा अहमद ने महिलाओं की मौजूदा शैक्षणिक, सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक स्थिति पर चिंता जताते हुए सहाबियात (रज़ि.) के उदाहरण दिए और कहा कि वे जीवन के हर सकारात्मक क्षेत्र में हमसे कहीं अधिक सक्रिय थीं। हम भी सभ्य समाज के निर्माण के लिए सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।कहकशां अल्तमिश ने कहा कि बच्चों की शिक्षा और परवरिश की ज़िम्मेदारी माँ के हाथ में है। यह दीया माँ के हाथ में है—इसे जलाने की ज़रूरत है। बच्चों को केवल दुनियावी शिक्षा ही नहीं, बल्कि धार्मिक ज्ञान देना भी उतना ही आवश्यक है।जेआईएच राज्य महिला मंडल परिषद की सदस्य ज़ेबा ख़ान ने आने वाले रमज़ान महीने की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए महिलाओं को तक़वा अपनाने, क़ुरआन पढ़ने, उसका अर्थ समझने और अपने जीवन को उसके रंग में ढालने के लिए प्रेरित किया।कार्यक्रम के अंत में 25 जनवरी को आयोजित क्विज़ प्रतियोगिता और पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाली महिलाओं और बच्चियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। सईदा बानो ने तराना पेश किया।कार्यक्रम का शुभारंभ रोमाना कौसर द्वारा पवित्र क़ुरआन के पठन से हुआ। जेआईएच विदर्भ ज़ोन सेक्रेटरी नफ़ीसा अतीक़ ने सम्मेलन के उद्देश्य और लक्ष्य स्पष्ट किए।कार्यक्रम का संचालन आयशा कुरैशी ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन तेलंगाना की वरिष्ठ सदस्य नसीरा महोदया ने किया। नासिरा ख़ानम की दुआ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।इस सम्मेलन में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चियां उपस्थित रहीं।यह जानकारी जेआईएच मीडिया सचिव डॉ. एम. ए. रशीद ने दी।









