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Tejo Mahalaya: ताजमहल के कमरे खुलवाने से सुप्रीम कोर्ट का इन्कार, कहा- हाईकोर्ट का फैसला सही

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (21 अक्टूबर, 2022) को ताजमहल के कमरों को खोलने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। इस याचिका में दावा किया गया है कि ताजमहल में एक “शिव मंदिर” था, जिसका नाम “तेजो महालय” था।

जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस एमएम सुंदरेश की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक आदेश को बरकरार रखते हुए इस याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह एक पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन है। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि उच्च न्यायालय ने याचिका को खारिज करने में कोई गलती नहीं की है।

यह याचिका डॉ रजनीश सिंह ने दायर की थी, जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अयोध्या इकाई के मीडिया प्रभारी होने का दावा किया है। याचिका में सत्य और तथ्य का पता लगाने की गुहार लगाई गई थी। याचिका में दावा किया गया कि मुगल सम्राट शाहजहां के आदेश पर ताजमहल के अंदर मूर्तियों और शिलालेखों जैसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक साक्ष्यों को छिपा दिया गया था, जिनका पता लगाने के लिए सरकार को निर्देश देने की मांग की गई थी।याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के समक्ष तर्क दिया था कि कई हिंदू समूह दावा कर रहे हैं कि ताजमहल एक पुराना शिव मंदिर है जिसे तेजो महालय के नाम से जाना जाता था, जिसे कई इतिहासकारों ने भी समर्थन दिया था। याचिका में यह भी कहा गया था कि इन दावों से ऐसी स्थिति पैदा हो गई है जहां हिंदू और मुसलमान आपस में लड़ रहे हैं और इसलिए विवाद को खत्म करने की जरूरत है।सिंह ने कहा कि ताजमहल की चार मंजिला इमारत के ऊपरी और निचले हिस्से में 22 कमरे हैं जो स्थायी रूप से बंद हैं और पीएन ओक जैसे इतिहासकारों और कई हिंदू उपासकों का मानना ​​है कि उन कमरों में एक शिव मंदिर है। यह पहली बार नहीं है जब “तेजो महालय” को लेकर इस तरह के दावे अदालतों के सामने आए हैं। आगरा में भी छह अधिवक्ताओं ने एक मुकदमे में तेजो महालय का दावा किया था, हालांकि, इसके जवाब में साल 2017 में सरकार ने कहा कि दावा “मनगढ़ंत” और “स्व-निर्मित” है।