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नागपुर में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का ईद मिलन समारोह, “सत्य और भाईचारे के लिए एकजुट होने का संदेश”

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नागपुर में जमाअत-ए-इस्लामी हिंद का ईद मिलन समारोह, “सत्य और भाईचारे के लिए एकजुट होने का संदेश”
नागपुर: जमाअत-ए-इस्लामी हिंद, नागपुर नॉर्थ वेस्ट और वेस्ट की ओर से ईद मिलन समारोह का आयोजन क्रमशः झिंगाबाई टाकली स्थित आविष्कार कॉलोनी के दारुस्सलाम तथा जाफ़र नगर स्थित ईदगाह ग्राउंड में किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति ने सर्वधर्म समभाव, एकता और भाईचारे का संदेश दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता औरंगाबाद से पधारे इस्लामिक स्कॉलर नौशाद उस्मान ने की। उन्होंने धार्मिक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए ईश्वर के प्रथम संदेशवाहक और प्रथम मानव हज़रत आदम का उल्लेख किया और कहा कि धरती के सभी मनुष्य आपस में भाई और सगे संबंधी हैं। उन्होंने बताया कि सभी धर्मों में उपवास का महत्व है और पवित्र कुरआन का हवाला देते हुए कहा, “ऐ किताब वालों! उन बातों की ओर आओ जो हममें और तुममें समान हैं।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब सत्ताधारी अपने लाभ के लिए एकजुट हो सकते हैं तो सत्य के अनुयायी सत्य के लिए एकजुट क्यों नहीं हो सकते। उन्होंने कहा कि इस्लाम कर्म से अधिक भावना को महत्व देता है और रोज़ा इंसान को नैतिकता, आत्मसंयम और ईश्वर-चेतना का पाठ पढ़ाता है—चाहे कोई देखे या न देखे, इंसान को गलत कार्य से बचना चाहिए क्योंकि अल्लाह सब देख रहा है।


इस अवसर पर पश्चिम नागपुर के आमदार विकास ठाकरे ने कहा, “भाईचारे से ही हमारे देश का अस्तित्व है और इस भाईचारे को किसी की नज़र नहीं लगनी चाहिए।”


कार्यक्रम में विलास खल्के, भंते विक्को कुशलधम्मो, श्रीमती संध्या दुबे, फादर अमित शिंदे ने नॉर्थ वेस्ट में तथा वेस्ट में डॉ अशोक उरकुड़े, जगजीत सिंह, मराठा सेवा संघ नागपुर के जिला सचिव बाळनाथ मानकर, पश्चिम नागपुर संभाजी ब्रिगेड के अध्यक्ष अभय वैद्य, गुरुदेव सेवा मंडल नागपुर के मोहनदास चोरे, सेंट जॉर्ज चर्च के पादरी डेनियल जार्जी, जमाअत-ए-इस्लामी हिंद राज्य सलाहकार समिति के सदस्य डॉ अनवार सिद्दीकी तथा जेआईएच नागपुर वेस्ट के अध्यक्ष डॉ नुरुल अमीन ने अपने विचार व्यक्त किए।


वक्ताओं ने समाज में उत्पन्न विभाजन, उपासना पद्धतियों में बदलाव, वर्ण व्यवस्था, सामाजिक असमानता और जन्म-आधारित भेदभाव जैसे मुद्दों पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इन सबके बावजूद हमें धर्मनिरपेक्ष भावना के साथ मातृभूमि के कल्याण हेतु श्रेष्ठ मानव बनना होगा और मानवता के लिए कार्य करना होगा। उन्होंने उपवास को केवल भूखे रहने का माध्यम न मानकर मन, विचार और कर्म की शुद्धता, क्रोध, लतों और विकारों के त्याग का साधन बताया। मानवता की सेवा को अमन और शांति का मार्ग बताया गया।
कार्यक्रम में बाइबल का संदेश भी साझा किया गया कि “जैसा प्रेम आप स्वयं से करते हैं, वैसा ही अपने पड़ोसी से करें।” साथ ही संगठनों का परिचय, उनकी कार्यप्रणाली और जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के साथ उनके पारस्परिक संबंधों के महत्व को भी साझा किया गया।


बताया गया कि नागपुर में लगभग 350 से अधिक मस्जिदों में मस्जिद परिचय कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें विभिन्न समुदायों के लोग शामिल होकर अज़ान, वुज़ू, नमाज़ और अन्य प्रक्रियाओं को समझते हैं, जिससे उनके भ्रम दूर होते हैं। ऐसे कार्यक्रम यह सिद्ध करते हैं कि पूरी मानवता एक ही माता-पिता की संतान है और विभिन्न त्योहारों को मिलजुलकर मनाना चाहिए।
कार्यक्रम की शुरुआत नॉर्थ वेस्ट में इब्राहीम साहब द्वारा कुरआन पाठ से हुई, जिसका हिंदी अनुवाद नफीसा साहिबा ने प्रस्तुत किया। अंत में जेआईएच नागपुर नॉर्थ वेस्ट के अध्यक्ष इंतिख़ाब ने आभार व्यक्त किया तथा मंच संचालन उमर ख़ान ने किया।
जाफ़र नगर ईदगाह ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में गिट्टीखदान पुलिस स्टेशन के पीआई विजय दिघे, नगरसेवकों में प्रमोद ठाकुर, सुनीता दीपक तभाने, शैलेश पांडे, मनसे शहर अध्यक्ष इंजीनियर चंदू दाढ़े, वसंत चांदेकर, मिलिंद जोड़े, विलास खांके, श्याम बाटेलवार, निमगाड़े साहब, नरेंद्र वाघमारे, स्नेहल ठाकरे, बंडू ठाकरे, रिज़वान रोमी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस दौरान जगजीत सिंह ने दिवंगत अमिताभ पावड़े को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जाफ़र नगर के नौजवानों का विशेष योगदान रहा।
कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी जमाअत-ए-इस्लामी हिंद के मीडिया सचिव डॉ एम. ए. रशीद ने दी।