गणतंत्र दिवस अमर रहे”नफ़रतें दूर हों , मौलिक अधिकारों की रक्षा के साथ नागरिक संविधान को बचाने आगे आएं”- डॉ एम ए रशीद, नागपुर

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गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ हमें भारतीय नागरिक होने पर गर्व करना चाहिए और इस दिन हमें अपने देश के सच्चे अर्थ , धर्मनिरपेक्षता और मानवता की महत्वपूर्ण संस्कृति को संरक्षित करने की शपथ लेनी चाहिए । 26 जनवरी 1950 को भारत का संविधान लागू हुआ था । हम इस दिन को बहुत उत्साह और खुशी के साथ मनाते हैं । आज के दिन हमारा यह गणतंत्र दिवस का 74 वां वर्ष हैं ।
विश्व के अन्य संविधानों की तुलना में भारत का संविधान सर्वोत्तम माना जाता है। यह संविधान सार्वजनिक सुरक्षा और आचरण की शर्त पर सभी नागरिकों को बोलने और विचार करने की स्वतंत्रता की गारंटी देता है ।
1947 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद जब 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ तो भारत एक स्वतंत्र देश बन गया।
हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों ने


देश वासियों और आने वाली पीढ़ियों को किसी प्रकार के संघर्ष से जूझना न पड़े , उन्हें गुलामी की जंज़ीरों से सदा की मुक्ती दिलाने के लिए बड़ी से बड़ी क़ुर्बानियां दीं । उनका सपना था कि देशवासी एकता, अखंडता के साथ मिलजुल कर देश को विकास की गति देंगे। इस संबंध में उन्होंने देश में पूर्ण गणतंत्र लाने के लिए कड़ा संघर्ष किया था । इनमें महात्मा गांधी जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री, चन्द्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सरदार वल्लभभाई पटेल, लाजपत राय आदि स्वतंत्रता सेनानी शामिल हैं। इन सभी महान लोगों ने भारत को एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अथक संघर्ष किया था।
इसके अलावा संविधान ने हर किसी देशवासी और उसके धर्म को स्वतंत्रता प्रदान की है। भारत के संविधान का कहता है कि आपको अपनी भाषा, उसकी लिपि और संस्कृति की रक्षा करने की पूरी तरह से आजादी है । इसलिए हम सभी को संविधान का ज्ञान और उसके कानून से परिचित होना बहुत आवश्यक है। संवैधानिक मूल्यों को लागू करने के लिए उठाया गया कोई भी कदम सराहनीय होता है।
हमारे संविधान ने तय किया है कि लोगों के धर्म में राज्य का कोई धर्म नहीं होगा। यह एक बड़ा फैसला संविधान सभा ने लिया था । संविधान के अनुरूप हमारे देश में सभी धर्म इंसान को मर्यादा में रहना सिखाते हैं। धर्म सरकार पर हावी नहीं होना चाहिए और सरकार को धर्म पर हावी नहीं होनी चाहिए। भारत कानूनी तौर पर एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है जहां सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बरकरार रखना समय की मांग है।
विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और उनके संवैधानिक अधिकारों को बिना किसी रोक टोक के जीवित रखा जाना चाहिए, यह देशहित में संविधान के प्रति सम्मानीय होगा । संविधान के अधिकारों से जो वंचित हो रहे हैं वे अपनी आवाज़ विभिन्न माध्यमों से उठा रहे हैं।
दूसरी ओर हमारा यह संविधान अल्पसंख्यकों को अपने धर्म का पालन करने और अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा करने का आश्वासन भी देता है।भारत के मौजूदा परिदृश्य में तथाकथित लोग मुस्लिम अल्पसंख्यकों के प्रति जिस क्रूरता को उजागर कर रहे हैं, वह वास्तव में इस्लामोफोबिया है। देश के मुसलमान भारत का अभिन्न अंग हैं , उन्हें सीएए के दायरे में लाना यानी देश के संविधान के अनुच्छेद 14 का पूर्ण उल्लंघन है जो विशेष रूप से धर्म के आधार पर किसी भी भेदभाव को प्रतिबंधित करता है। भारत कानूनी तौर पर एक धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है जहां सभी धर्मों के लोगों को समान अधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता प्राप्त है। देश के लोकतांत्रिक मूल्यों और धर्मनिरपेक्ष ढांचे को बरकरार रखना समय की मांग है। संविधान को सुरक्षित रखते हुए उस के पालन करने पर बल दिया जाना चाहिए। किसी के मौलिक अधिकार प्रभावित न हों।
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शहर में गणतंत्र दिवस अमर रखने के लिए “धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र के लिए संगठन का संघ ने “संविधान बचाओ, देश बचाओ” पर आज रैली का आयोजन किया है। इस के माध्यम से कहा जा रहा है कि आज देश अस्थिर है। सामाजिक चेतना कुंद होती जा रही है। महिलाओं और बहुजनों की उपेक्षा की जा रही है. फिर भी समुदाय शांतिपूर्ण है। आज हमारा देश एक गणतंत्र के रूप में उभरा। लेकिन आज संविधान द्वारा दिए गए मूल्यों को कुचला जा रहा है। इसके लिए युवाओं, महिलाओं और सभी नागरिकों को भूमिका निभानी होगी। इसके लिए शहर के सामाजिक संगठनों ने पहल की है। इसलिए भारतीय गणतंत्र और संविधान के सम्मान के लिए स्कूटर और कार रैली का आयोजन किया गया है। युवा और बुज़ुर्ग इस रैली में भाग ले क‌र देश व संविधान का सम्मान बनाये रखने की गुहार लगाई जा रही है।
इसी संघ के माध्यम से यह दोहराया जा रहा है कि भारतवासियों का एक ही नारा – समता एवं भाईचारा । यह भी स्मरण कराया जा रहा है कि वर्तमान परिस्थिति में हमारा देश सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विषमताओं की आग मे झुलस रहा है। इससे निजात पाने के लिए यदि हम संविधानिक मार्ग से चलें तो देश में भाईचारा, शांति एवं संम्पन्नता स्थापित हो सकती हैं।
इस के माध्यम से मांग की जा रही है कि कृषिप्रधान देश में अन्नदाता किसान को सन्मानपूर्वक, स्वावलंबी एवं न्यायपूर्ण आय मिलनी चाहिए।
पिछले 10 वर्षों में देश की महिलाएं जो देश की आधी आबादी हैं, आज असुरक्षा और भय के माहौल में जी रही हैं, उन्हें हिंसा, विनयभंग, बलात्कार इन सभी त्रासदियों से मुक्ति मिलनी चाहिए।
देश में हर युवक-युक्ती को योग्यतानुसार रोज़गार और कौशल्य के सामान अवसर तथा सम्मानपूर्व आमदनी मिलनी चाहिए।
देश का हर व्यक्ति एवं व्यक्तियों का समूह एक दूसरे से जाती धर्म एवं पंथ से ऊपर उठ कर देशहित में बंधुतापूर्वक व्यवहार करना चाहिए।
शिक्षा के निजीकरण में ग्रामीण शिक्षा जो ख़त्म होने जा रही है, शहरी शिक्षा ख़र्चा जो दुगुना हुआ हैं, महंगी उच्च शिक्षा जो पहुंच से बाहर हैं, इसलिए सभी कों समान शिक्षा सरकारी खर्चे से मिलनी चाहिए।
स्वास्थ सेवाएं जो आम आदमी के पहुंच के बाहर हैं, सरकारी खर्चें से मिलनी चाहिए तथा सभी सार्वजनिक सेवाओं की ज़िम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए। सभी ग्रामीण एवं शहरी बस्तियों में मुलभुत सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
विकास केवल दिखावटी न होकर सर्वसमावेशक, रोज़गार देने वाला और देहात से शुरू होना चाहिए।
महंगाई जो आसमान है रही है जिससे आर्थिक विषमता तथा कुपोषण बढ़ रहा है, उसपर सरकार को विशेष ध्यान देकर उसका उपाय योजन करना चाहिए।
अभिव्यक्ति स्वातंत्र्य जो पूर्णतः खतरे में हैं, वह पूरी तरह बहाल होनी चाहिए और भ्रष्ट स्वार्थ से प्रेरित निचले स्तर की राजनीती करके सरकारी संथाओं का दुरुपयोग बंद होना चाहिए।
दूसरी ओर “महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ़ोरम” “मेरा मतपत्र मेरी शक्ति” के नाम से “मतपत्र सबसे शक्तिशाली अस्त्र” से कह रहा है कि लोकतांत्रिक समाज में मतपत्र सबसे शक्तिशाली अस्त्र है, मतदान के माध्यम से अपनी चाह की सरकार चुन सकते हैं और अक्षम सरकार को सत्ता से हटा भी सकते हैं।
मतपत्र एक ओर स्थिर लोकतंत्र और देश की सुरक्षा का रक्षक है तो दूसरी ओर धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की प्रत्याभूति भी है। उसका मानना है कि यह उसी समय संभव है कि जब किसी नागरिक ने अपना नाम मतदाता सूची में सम्मिलित करवा लिया हो। जब किसी के पास न केवल वोटर कार्ड हो बल्कि उसका आपका नाम वोटर लिस्ट में सत्य विवरण के साथ नामांकित भी हो। इस प्रकार वह माननता है कि जब कोई मतदाता मत देने के लिए पोलिंग बूथ पर जाएं तो अपने प्रिय उम्मीदवार को वोट दें सकें।
इस संबंध में “महाराष्ट्र डेमोक्रेटिक फ़ोरम” ने प्रश्न किया है कि क्या नागरिकों ने अपना नाम , अपने परिवार के सदस्यों का नाम जिनकी आयु 18 वर्ष हो चुकी हैं उन्हें पंजीकृत करवा ली है?? क्या उन्होंने वोटर कार्ड होने के बावजूद अपना, अपने परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट में चेक कर लिया है? यदि यह सब नहीं हुआ है तो फिर उसने अपील की है कि एक उत्तरदायी नागरिक बन कर अपना , अपने परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट में जांचें भी और उनका पंजीकरण करवाएं भी। चुनाव के दिन वोट देने भी जाएं। उसने अपने मत पत्र की शक्ति को पहचानने और समृद्ध भारत के निर्माण में आवश्यक प्रयास के प्रति जागरूक होने की अपील की है।