तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो”,वलीउल्लाह ख़ान

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“तुम ही गालिब रहोगे अगर तुम मोमिन हो” —— वलीउल्लाह ख़ान

नागपुर – देश में नफ़रतों के बढ़ने से मुसलमान भयभीत दिखाई दे रहे हैं। मुस्लिम समुदाय पर अनेकों प्रकार के प्रहार किए जा रहे हैं। हमें कठिन परीक्षाओं से गुज़रना पड़ रहा है। यह परीक्षाएं अल्लाह की ओर से होती हैं ताकि वह बंदों को अच्छा प्रतिफल दे। इस सिलसिले में हमें सुरह बक़र की 155 पंक्ति पर ध्यान देना चाहिए जिसमें अल्लाह ने कहा कि “हम तुम्हें कुछ खौफ़ और भूख से और मालों और जानों और फलों की कमी से ज़रुर आज़माएंगे और (ऐ रसूल) ऐसे सब्र करने वालों को ख़ुशख़बरी दे दो”। इसलिए हमें अपने दीन पर क़ायम रहना चाहिए , जिसका उदाहरण सहाबा ए किराम की ज़िंदगियों में दिखाई देता है। वे हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं। ये विचार जमाअत ए इस्लामी हिंद के सेक्रेटरी मौलाना वलीउल्लाह सईदी फ़लाही ने सभा को संबोधित करते हुए कहे । इस सभा का आयोजन जमाअत ए इस्लामी हिंद, नागपुर के तत्वावधान में मोमिनपूरा की जामा मस्जिद में आयोजित किया गया था। उन्होंने आगे कहा कि हमारे अंदर सचेत ईमान की आवश्यकता है ।


हमारा प्रभु बहुत महान है , वह जो चाहता है इस लोक में हो जाता है। इस प्रकार जब हमारा ईमान अल्लाह पर है तो उस दृष्टिकोण से हमारा ईमान और भी मज़बूत होना चाहिए। मज़बूत ईमान से बंदा हर प्रकार की परिक्षाओं में सफल होता है। अल्लाह अपने बंदे की क़ुर्बानियों और परिक्षाओं पर वह उसकी लाज अवश्य रखता है । जब भी हमारे व्यक्तिगत जीवन में किसी भी प्रकार का संकट आए , चाहे व्यवसाय में घाटा ही क्यों न हो जाए, वेतन की समस्याएं , पारिवारिक सदस्यों में (अल्लाह न करे ) कोई रोगग्रस्त हो जाए , किसी अत्याचारी के दमन का शिकार हो जाएं तब भी हमें अल्लाह को अपना साथी मानना चाहिए। स्पष्ट हो कि विपत्तियों में मज़बूत ईमान वालों को एक तरह का असीमित आनंद महसूस होता है।
इन सब मामलों में हमारा ईमान ऐसा हो कि घर हो कि समाज सभी लोगों को हम से संतुष्टि मिलना चाहिए , चाहे कोई कितना ही बड़ा अत्याचारी क्यों न हो, हमें हर किसी को नरक में जाने से बचाना चाहिए।
हमें अपने बीच एकजुटता पैदा करना चाहिए। पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु ने उम्मत को एक बनाया था, ग़ैरों को भी अपना कहा था , उन्हें अपने छाती से लगाया था, लेकिन अफ़सोस हम अपनों को ही ग़ैर समझने लगे और अपने अपने समुदाय बना लिए। सभी ईमाम हमारे हैं , हमको सभी के मार्गदर्शन से लाभ उठाना चाहिए , हमें मुसलमान के नाते सभी समुदाय वालों को अपना भाई समझना चाहिए।
उन्होंने कहा कि विरोधी लोग इस्लाम के प्रति बहुत सी भ्रांतियां फैला रहे हैं। क़ुरआन, हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और दीन के बारे में प्रोपेगेंडा की बाढ़ सी आई हुई है । नफ़रतों के कारण समझदार लोगों के मन भ्रष्ट हो रहे हैं। ऐसे समय हमें लोगों तक इस्लाम और पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की जीवनी संबंध में जानकारियों से अवगत कराना चाहिए । भ्रांतियों को दूर करने के लिए हमें इस्लामी आदर्शों को परोसना पड़ेगा वरना झूठ सच साबित हो जाएगा। हमारे अख़लाक़ अच्छे होने के कारण बुराईयों का जवाब भलाइयों से दिया जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में विरोधी भी जिगरी दोस्त बन जाएगा। इसके लिए दिल की दुनिया को नरम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमारे पारस्परिक संबंध अच्छे होने चाहिए। देशवासियों में किसी की बीमारी , किसी परेशानी को दूर करना , मौत मिट्टी में उन्हें सांत्वना देना हमारा पैगंबरी कर्तव्य बनना चाहिए । इस सभा में अत्यधिक संख्या में लोगों की उपस्थिति थी ।
इस सभा का संचालन साजिद अहमद ने और पवित्र क़ुरआन पठन से इसका आरंभ जमाअ़त ए इस्लामी हिंद नागपुर के ज़िला अध्यक्ष शाकिरुल अकरम फ़लाही ने से किया।